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  • गणतन्त्र दिवस

    छब्बीस जनवरी की परेड में
    हांथी देखे घोड़े देखे, देखे तोप जहाज
    भारत की ताकत दुनिया को
    दिखलाते हम आज

    प्यारी प्यारी सजी झाँकियाँ
    अद्भुत रीति रिवाज
    भारत की ताकत दुनिया को
    दिखलाते हम आज

    नमन शहीदों को करते हम
    जिन पर सबको नाज
    भारत की ताकत दुनिया को
    दिखलाते हम आज

    हम एक थे हम एक हैं
    गूँज रही आवाज
    भारत की ताकत दुनिया को
    दिखलाते हम आज

    नीरज त्रिपाठी

    मुन्ने की कार

    मुन्ने की कार

    मुन्ने की प्यारी सी कार
    रंग लाल है पहिये चार

    नीले पीले हरे खिलौने
    डिग्गी में हैं भरे खिलौने।

    छोटी छोटी सी दो लाइट
    हार्न बजाकर मुड़ता राइट

    झीली टूटू दीपू आए
    मुन्ना सबको सैर कराये।

    नीरज त्रिपाठी

    नया साल जंगल में आया

    बंदरिया मेक अप कर आई
    बन्दर ने दाढ़ी बनवाई
    गदहे ने परफ्यूम लगाया
    नया साल जंगल में आया

    हैट लगाकर आई हथिनी
    टाईट जींस भालू ने पहनी
    शेर ने सबको डिनर कराया
    नया साल जंगल में आया

    मगरमच्छ ने टॉफी बांटी
    पैंट सूट में आया हाथी
    सबने मिलके केक मंगाया
    नया साल जंगल में आया

    ग्रीटिंग कार्ड सभी ने बांटे
    चूहे के संग चुहिया नाचे
    कछुए ने एक गाना गाया
    नया साल जंगल में आया

    सभी नन्हें मुन्नों को बाल दिवस की ढेरों शुभकामनायें

    माँ मैं कितना नन्हा हूँ
    जल्दी मुझको बड़ा करो
    छू लूँ जाकर आसमान को
    ऐसे मुझको खड़ा करो

    मेरी अच्छी प्यारी माँ
    मुझको कर दो तगड़ा
    मारूँ पीटूँ मैं खूब सबको
    जब हो जाए झगड़ा

    झगड़ा नहीं हैं करते बेटा
    ये है गंदी बात
    झगड़ा जो भी बच्चे करते
    उनको पड़ती डांट

    अच्छा तो माँ तुम ही बोलो
    मैं क्या हूँ कर सकता
    अब मैं खूब पढ़ूँगा मम्मी
    ला दो मुझको बस्ता

    ठीक है मेरे प्यारे बेटा
    ला दूँगी मैं बस्ता
    मैं तो बस इतना ही चाहूँ
    सदा रहे तू हँसता

    नीरज त्रिपाठी

    शुभ दीपावली

    दीपावली के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनायें। ईश्वर आप सभी का जीवन प्रकाशमय करे।

    मन मंदिर हर्षित हुआ, छाई खुशी अपार
    जगमग जगमग जग करे, सजे भवन औ द्वार
    सजे भवन औ द्वार, आज आई दीवाली
    पूजन वंदन करो, सजा पूजा की थाली
    परखो एक मिठाई, तुरत दूजी को जाँचो
    रॉकेट बनकर उड़ो, कभी फिरकी बन नाचो

    हिडेन कैमरा

    गलती हमने मान ली, पकड़ रहे हैं कान
    कमरे में है कैमरा, थे इससे अन्जान
    थे इससे अन्जान, नहीं तो कभी न लेते
    पहले ही गोदाम तिजोरी, भरे हुए थे
    ढूंढ रहे हैं काट, कैमरे की सब नेता
    जाने कब किसे बनाए, मीडिया चहेता

    नीरज त्रिपाठी

    पैसों के पेड़

    विश्वभ्रमण की लालसा, लेकर हुए अधेड़
    काश हमारे पास हों, पैसों के कुछ पेड़
    पैसों के कुछ पेड़, नैन कजरारे गायें
    कटरीना संग अमरीका का टिकट कटाएँ
    अँग्रेजी गानों को गाते, डिस्को जाते
    पचपन में बचपन के लम्हे, बहुत सताते

    नीरज त्रिपाठी

    चप्पल प्रेम

    चप्पल की इच्छा जगी, खोया दिल का चैन
    चप्पल लाने के लिए, भेज दिया इक प्लेन
    भेज दिया इक प्लेन, पैर मेरा प्यारा सा
    मेरे आगे फीकी हैं, उर्मिला बिपाशा
    सभी हिरोईनों पे, मैं पड़ती हूँ भारी
    मेरे ठुमकों से डोलें, सरकारें सारी

    ऊपर की पंक्तियाँ वास्तविक घटनाओं पे आधारित है ॥ किसी काल्पनिकता से इसका मिलाप महज एक संयोग है ।

    नीरज त्रिपाठी

    परीक्षाभवन

    शिक्षक दिवस के अवसर पर एक कविता याद आ गयी

    परीक्षाभवन

    परीक्षाभवन में आज फिर होने लगा आत्ममंथन मेरा
    काश कुछ पढ़ा होता याद कुछ करा होता

    प्रश्नपत्र देखते ही मेरा सर चकरा गया
    पढ़ी थी अमोनिया, फास्फोरस आ गया

    छात्र एकता संकल्प हमारा है
    आज तो बस नकल का ही सहारा है

    मैंने सोचा पानी पीने जाता हूँ
    वहीं इधर उधर से दो चार पर्ची ले आता हूँ

    मैंने पूछा सर पानी पीने जाऊँ
    सर बोले ज्यादा प्यासे हो तो पानी वाले को यहीं बुलाऊँ
    कैसे दूँ मैं गुरु को झांसा मेरा मन पर्ची का प्यासा

    हाय कितने सख्त शिक्षक रूम में पड़े हैं
    आधे घंटे से मेरे ही सर पे खड़े हैं

    मैंने सर को भोलेपन से देखा और ब्रह्मास्त्र फेंका
    सर पिछले कुछ दिनों से मेरी तबीयत खराब रही है
    इधर बहुत गर्मी लग रही है
    सर मेरे साथ थोड़ी रियायत कीजिये
    मुझे उस पंखे के नीचे बिठा दीजिये

    सर बोले उधर का पंखा तो और भी धीरे चल रहा है
    उधर बैठे बच्चों के देखो कितना पसीना निकल रहा है
    तुम मेरी कुर्सी पे आओ समय निकल रहा है

    कुछ छात्र तो उत्तर लिख रहे थे
    लेकिन अधिकतर परेशान दिख रहे थे

    तभी एक छात्र बोला
    सर इतनी सख्ती, क्या ये सही है
    ऐसे माहौल में बहुत परेशानी हो रही है

    गुरु जी बोले मैं नकल नहीं करने दूँगा
    गर्दन हिली तो कॉपी छीन लूँगा

    सर ये आप कर क्या रहे हैं,
    परीक्षा का इस तरह मखौल मत उड़ाइए
    जाइए थोड़ा पान वान खाकर आइये

    हमारे उतरे हुए चेहरे देख गुरुजी मंद मंद मुस्काने लगे
    और अपनी जेब से पान की पुड़िया निकाल वहीं पान खाने लगे

    लगता है आज मैं अपने शाकाहारी व्रत को बचा नहीं पाऊँगा
    अपने जीवन का प्रथम अंडा इसी प्रश्नपत्र में खाऊँगा

    शायद ये मेरे पिछले कुकर्मों का हिसाब है
    आज भाग्य भी कुछ ज्यादा ही खराब है

    अंततः मैं बोला ठीक है सर इजाजत दीजिये
    बहुत हुआ अब मेरी कॉपी जमा कर लीजिये

    इस घटना के दो महीने बाद,
    पिताश्री अपनी अभिव्यक्तियों को मुझ पर वार रहे थे
    मेरे ही भीगे जूतों से मेरे केश संवार रहे थे॥

    मेरे जैसे सभी परीक्षार्थियों के साथ सहानुभूति सहित

    आपका
    नीरज त्रिपाठी

    पैसा वसूली

    डरें लोग सब आपसे , कीजे जतन उपाय
    दूध फलन को चापकर, लीजे बदन बनाय
    लीजे बदन बनाय, डरें कल्लू औ गामा
    घूर अगर दें आप , सरक जाये पैजामा
    दस बारह टपकाइए , हो जायेगा नाम
    बैठ वसूली कीजिये , धन आएगा धाम

    नीरज त्रिपाठी

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