क से है कन्याकुमारी
जहां तक सीमा हमारी
क से है कश्मीर भी
और क से ही है कारिगल
क से ही था वह कबूतर
शान्ति का हमने उड़ाया
लेकिन हमेशा की तरह
इस बार भी है धोखा खाया
शत्रु ने जब भी है छेड़ा
हर बार हमने है खदेड़ा
शान्ति के हम हैं पुजारी
लेकिन हुआ जब युद्व जारी
युद्व के इस सघन पथ [...]
January 26, 2008
Categories: सामान्य/General . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 1 Comment
मुर्गी कुड़्कुड़ाई, मुर्गे चिल्लाने लगे
मुर्गों के जुकाम से प्रशासन में बुखार के
लक्षण नजर आने लगे
मुर्गे पकड़ने में जुटे अधिकारी
गए बाकी सब भूल
मुर्गे पकड़ते पकड़ते पहुंचे एक स्कूल
स्कूल से दस मुर्गे पकड़ अधिकारियों के
सीने तने हुए थे
बाद में पता चला थे तीन असली मुर्गे और सात बच्चे
जो उस समय मुर्गा बने हुए थे
यह देख प्रशासन ने [...]
January 21, 2008
Categories: व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 2 Comments
धूम्रपान एक कार्य महान
सिगरेट है संजीवनी
पीकर स्वास्थय बनाओ
समय से पहले बूढ़े होकर
रियायतों का लाभ उठाओ
दूध और फल खाकर
हरगोपाल बनते हैं
हैरी और माइकल तो
सिगरेट पीकर निकलते हैं
जो नहीं पीते उन्हें
इस सुख से अवगत कराओ
बस में रेल में सार्वजनिक स्थलों पर
सिगरेट सुलगाओ
अगर पैसे कम हैं
फिर भी काम चला लो
जरूरी नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो
बीड़ी सफलता [...]
January 12, 2008
Categories: व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments
जब मैं छोटा था नासमझ था
सोचता था अपना सब कुछ देश हित में लगाऊँगा
अब मैं टैक्स की चोरी करता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ
जब मैं छोटा था नासमझ था
लोग मेरा मन मेरी आंखों से पढ़ लेते थे
अब मैं काला चश्मा लगाता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया [...]
January 7, 2008
Categories: सामान्य/General . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: No Comments
सभी हिन्दी प्रेमियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …
ग्रीटिंग हमको मिले बहुत
अबकी मनी आर्डर मिल जाए
नया साल कुछ ऐसे आए
अब तक तो घूरा है उसने
अब जब देखे वो मुस्काये
नया साल कुछ ऐसे आए
उसने पैसे मुझे दिए थे
ऐसे भूले याद न आए
नया साल कुछ ऐसे आए
कोई ऐसा यार मिले
फोकट में जो चाय पिलाये
नया साल कुछ [...]
January 5, 2008
Categories: सामान्य/General . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 1 Comment