धूम्रपान
धूम्रपान एक कार्य महान
सिगरेट है संजीवनी
पीकर स्वास्थय बनाओ
समय से पहले बूढ़े होकर
रियायतों का लाभ उठाओ
दूध और फल खाकर
हरगोपाल बनते हैं
हैरी और माइकल तो
सिगरेट पीकर निकलते हैं
जो नहीं पीते उन्हें
इस सुख से अवगत कराओ
बस में रेल में सार्वजनिक स्थलों पर
सिगरेट सुलगाओ
अगर पैसे कम हैं
फिर भी काम चला लो
जरूरी नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो
बीड़ी सफलता की सीढ़ी
इस पर चढ़ते चले जाओ
मेहनत की कमाई
सही काम में लगाओ
जो हड्डियां गलाते हैं
वो तपस्वी कहलाते हैं
ऐ कलयुग के दधीचि
हड्डियों के साथ करो
फेफड़े और गुर्दे भी कुर्बान
क्योंकि…
धूम्रपान एक कार्य महान
4 Comments
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बहुत खूब धूम्रपान को बढ़ावा दे .न करने वालो को अच्छी राह बताई है .ना पीने वाले पीकर देखे ओर अपने उपर जाने क़ी जल्दी तैयारी करे | बढ़िया व्यंग्य से लबरेज कविता |
Good one..
though smokers like me dont give a damn to this
“ऐ कलयुग के दधीचि
हड्डियों के साथ करो
फेफड़े और गुर्दे भी कुर्बान
क्योंकि…
धूम्रपान एक कार्य महान”
बहुत बढ़िया व्यंग्य है.
सही है।करो धांस के धूम्रपान। जल्दी पहुंचो श्मशान।