बस एक ध्येय बस एक लक्ष्य वो जहर उगलते जाते हैं
भावुक भोली जनता का ख़ुद को शुभचिंतक बतलाते हैं
सत्ता लोलुप घडियालों का कोई ईमान नही होता
नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता
बन रहे शेर सब आज भेडिये खूनी दांत छिपाते हैं
पूज्य शिवाजी को वो अपना आदर्श बताते [...]
March 31, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, सामान्य/General . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 2 Comments
नोट
कुछ नोट
जिन्हें देख रिक्शे वाले,खोमचे वाले
कहते हैं
बहुत बड़ा नोट है बाबू टूटे दो
वही नोट
शराब के ठेके पर, उस विदेशी शोरूम में
लगते हैं
बहुत छोटे……….
नीरज त्रिपाठी
March 28, 2008
Categories: कविता, नीरज त्रिपाठी . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 3 Comments
उस दिन
मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ
March 23, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments
हमारे पतलू भाई
नीरज त्रिपाठी
पतलू भाई जिन्हें कुछ लोग किताबी कीड़ा कहते तो कुछ किताबें चाटने वाला दीमक। पतलू भाई थे मस्त मौला जो इन सब बातों को सुनकर वैसे ही अनसुना कर दिया करते जैसे संगीत के जानकार आजकल के फ़िल्मी गानों को। पढ़ाई और तैयारी तक तो सब ठीक रहता लेकिन परिणाम का तो [...]
March 10, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 5 Comments