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  • महाराष्ट्र में नवनिर्माण

    बस एक ध्येय बस एक लक्ष्य वो जहर उगलते जाते हैं
    भावुक भोली जनता का ख़ुद को शुभचिंतक बतलाते हैं
    सत्ता लोलुप घडियालों का कोई ईमान नही होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता
    बन रहे शेर सब आज भेडिये खूनी दांत छिपाते हैं
    पूज्य शिवाजी को वो अपना आदर्श बताते [...]

    नोट – नीरज त्रिपाठी

    नोट
    कुछ नोट
    जिन्हें देख रिक्शे वाले,खोमचे वाले
    कहते हैं
    बहुत बड़ा नोट है बाबू टूटे दो
    वही नोट
    शराब के ठेके पर, उस विदेशी शोरूम में
    लगते हैं
    बहुत छोटे……….
    नीरज त्रिपाठी

    मैं और तुम

    उस दिन
    मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
    थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
    मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
    उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
    अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ

    हमारे पतलू भाई

    हमारे पतलू भाई
    नीरज त्रिपाठी
    पतलू भाई जिन्हें कुछ लोग किताबी कीड़ा कहते तो कुछ किताबें चाटने वाला दीमक। पतलू भाई थे मस्त मौला जो इन सब बातों को सुनकर वैसे ही अनसुना कर दिया करते जैसे संगीत के जानकार आजकल के फ़िल्मी गानों को। पढ़ाई और तैयारी तक तो सब ठीक रहता लेकिन परिणाम का तो [...]