मैं और तुम
उस दिन
मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ

उस दिन
मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ
March 23, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments