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  • महाराष्ट्र में नवनिर्माण

    बस एक ध्येय बस एक लक्ष्य वो जहर उगलते जाते हैं
    भावुक भोली जनता का ख़ुद को शुभचिंतक बतलाते हैं
    सत्ता लोलुप घडियालों का कोई ईमान नही होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता

    बन रहे शेर सब आज भेडिये खूनी दांत छिपाते हैं
    पूज्य शिवाजी को वो अपना आदर्श बताते हैं
    क्या इन ओछी घटनाओं से उन वीरों का अपमान नहीं होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता

    उजले कपडों की चमचम से वो मन का मैल छिपाते हैं
    सुलझे मुद्दों में आग लगा वो जनता को भड़काते हैं
    कपट द्वेष से कोई  यशस्वी आयुष्मान नहीं होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता

    फसल प्यार की काट वहाँ नफरत के बीज उगाते हैं
    हिंसक घटनाओं को बेशर्मी से जायज ठहराते हैं
    मार पीट हिंसा से कभी कहीं कोई उत्थान नहीं होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता

    नीरज त्रिपाठी

    2 Comments

    1. बहुत सुंदर रचना! तथ्यों को बड़े अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया हैं। बस लिखते रहिए।
      बधाई!

    2. bahut sunder rachna


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