सोचा जब सब लेते हैं तो हम भी मजा लेंगे
भोलू बनकर कब तक जीवन यापन करेंगे
सुनहरा मौसम तिथि एकादशी कार्तिक मास
कर दी शुरू हमने अपने प्यार की तलाश
आंखों में आंखें हाथ हाथों में
कट रहे थे दिन मीठी मीठी बातों में
हम सिनेमा नहीं देखते थे वो बोलीं देखेंगे
हमने सोचा चार दिन की जिंदगी है मजे लेंगे
फिर [...]
April 16, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 3 Comments
पति या कुत्ता
नीरज त्रिपाठी
उस दिन शर्मा जी जब घर लौटे तो उन्होने देखा कि पूरे घर में सजावट थी और बड़ा सा केक भी रखा था, शर्मा जी के कुछ सोचने से पहले ही उनकी पत्नी नीलू जी ने अचानक प्रकट होते हुए कहा ‘…सरप्राइज।’ शर्मा जी ने सोचा कि उन्हें अपना जन्मदिन याद नहीं [...]
April 11, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 8 Comments