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  • प्यार व्यार

     

    सोचा जब सब लेते हैं तो हम भी मजा लेंगे
    भोलू बनकर कब तक जीवन यापन करेंगे

    सुनहरा मौसम तिथि एकादशी कार्तिक मास
    कर दी शुरू हमने अपने प्यार की तलाश

    आंखों में आंखें हाथ हाथों में
    कट रहे थे दिन मीठी मीठी बातों में

    हम सिनेमा नहीं देखते थे वो बोलीं देखेंगे
    हमने सोचा चार दिन की जिंदगी है मजे लेंगे

    फिर तो
    पिज्जा बर्गर स्लो फ़ूड फास्ट फ़ूड सब कुछ खाया
    उधर पिता श्री सोचते लड़के का मनी आर्डर नहीं आया

    उसने खायीं कसमें हमने कुछ वादे किए
    यहाँ तक कि बच्चों के नाम तक सोच लिए

    तभी बच्चों के नाना जी ने तबाही मचा दी
    किसी और महापुरुष से तय की अंजली की शादी

    मैंने सोचा अंजली रोएगी उसने ठहाका लगाया
    बोली अरे वाह इतना अच्छा रिश्ता मेरे लिए आया

    बच्चों की माँ तो बच्चों के नाना जी से भी तेज निकली
    अच्छा रिश्ता देख आइस क्रीम की तरह पिघली

    ये पाँच साल पुरानी बात है
    आज अंजली उस  महापुरुष के दो बच्चों कि माँ है
    और हम अब भी ढूंढ रहे हैं
    हमारे होने वाले बच्चों की मम्मी कहाँ हैं

    3 Comments

    1. चलिये, कोई बात नहीं. मन छोटा न करें. कुछ न कुछ हो ही लेगा बस प्रयास जारी रखें. कौन सा ऐसा वक्त गुजरा जा रहा है. :)

    2. पिता श्री को मनी आर्डर भेजना शुरू कर दो, मनोकामना पूरी हो जाएगी।
      कुशल इसी में है। मुझे तो इस बात की फिक्र है कि प्यार-व्यार के चक्कर
      में कहीं सारा सर सफेद हो जाएगा।
      वैसे रचना बड़ी मजेदार लगी। लिते रहो।

    3. बच्चों की माँ तो बच्चों के नाना जी से भी तेज निकली
      अच्छा रिश्ता देख आइस क्रीम की तरह पिघली
      are jabardast niraj ji mast kavita likhi aapne


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