लाल है अब शहर था कल तक गुलाबी
मिट गया सिंदूर हाथ मेंहदी है अभी भी
राख है वो आज मासूमियत उसकी हँसी
सुलगेगी बस अब जिंदगी भर जिंदगी
वो जहाँ जब भी जो चाहेंगे करेंगे
हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे
था लगा मन में वो कुछ सपने संजोने
था क्या पता हैं पापियों के हम खिलौने
बम फटे [...]
May 14, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, सामान्य/General . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments
ऐंटी सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
लड़िकयों ने किया विचारमंथन
टकराव का बनाया मन
शुरू हुआ देशव्यापी धरना प्रदर्शन
विचित्र समस्या आ गई आज
जब लड़िकयों ने उठाई
सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
के खिलाफ आवाज
अब मुश्किल चुप रहना था
लड़िकयों का बस केवल
इतना कहना था
इस कमेटी के कारण
लड़के हमसे डरते हैं
न हमें देखते हैं
न प्रपोज करते हैं
इस कमेटी का [...]
May 6, 2008
Categories: कविता, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 5 Comments