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  • एक और विस्फोट

    लाल है अब शहर था कल तक गुलाबी
    मिट गया सिंदूर हाथ मेंहदी है अभी भी
    राख है वो आज मासूमियत उसकी हँसी
    सुलगेगी बस अब जिंदगी भर जिंदगी
    वो जहाँ जब भी जो चाहेंगे करेंगे
    हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे
    था लगा मन में वो कुछ सपने संजोने
    था क्या पता हैं पापियों के हम खिलौने
    बम फटे [...]