पिछले महीने एक हफ्ते की छुट्टी मिली | मन में उमंगें और उत्साह लिए उछलते हुए निकल पड़े हम एक शहर की सैर पर | ट्रेन के सफर में हमारा अंतर्मन कुछ ज्यादा मजा लेता है तो हम छुक्छुकाने लगे एक सुपरफास्ट एक्सप्रेस और उसमें बैठे कुछ सहयात्रियों के साथ | इधर ट्रेन ने प्लेटफार्म [...]
September 14, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 3 Comments
बचपन में माँ से था सुना जल देव हैं जीवन आधार
जल ही जल बस जल ही जल हर तरफ़ चीख बिलख हाहाकार
उजड़ने बहने का मौसम वीभत्स है डरावना है
कोसी के इस अभिशाप को इस कहर को मिल थामना है
खोयी हँसी खोयी खुशी सब खो गयीं बातें वहां
बह गए हैं घर बहुत अब बह रहीं आँखें [...]
September 1, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments