बचपन में माँ से था सुना जल देव हैं जीवन आधार
जल ही जल बस जल ही जल हर तरफ़ चीख बिलख हाहाकार
उजड़ने बहने का मौसम वीभत्स है डरावना है
कोसी के इस अभिशाप को इस कहर को मिल थामना है
खोयी हँसी खोयी खुशी सब खो गयीं बातें वहां
बह गए हैं घर बहुत अब बह रहीं आँखें वहां
कुछ घाव हैं ऐसे मिले जिनका निशां न मिट सकेगा
पैसा मिलेगा घर बनेगा अपने जो बिछडे कौन देगा
बूढे कुछ बच्चे बहुत लड़ न सके इस प्रलय से
है जिंदगी की ज़ंग ये लड़नी हमें निष्ठुर समय से
खोयी हँसी खोयी खुशी सब खो गयीं बातें वहां
बह गए हैं घर बहुत अब बह रहीं आँखें वहां
अपनों को खोने की कसक मन में लिए वो जी रहे
खून के कुछ घूँट और आंसू बहुत हैं पी रहे
ठिठुरते ताकें वहां वो भाई अपने अभागे मदद को
बस हाथ कुछ हैं चाहिए जो आ सकें आगे मदद को
खोयी हँसी खोयी खुशी सब खो गयीं बातें वहां
बह गए हैं घर बहुत अब बह रहीं आँखें वहां
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कल डीयू के सोशल वर्क स्कूल से छात्रों की एक खेप सहरसा के लिए रवाना हो चुकी है। सफर,डीयू और दूसरे संस्थाओं के लोगों ने आज बैठक की है और बहुत जल्द ही दूसरी खेप जानेवाली है.आप सबसे अनुरोध है कि आप जिस रुप में मदद करना चाहें, समपर्क करें-
राकेश कुमार – 9811972872..
जामिया (दिल्ली) के भी कुछ साथी बाढ़ राहत में लगे हैं,
यदि आप चाहें तो उनसे बात कर सकते हैं -
महताब आलम – ०९८११२०९३४५
रोहित वत्स – ०९८६८०७६८६५
अफरोज आलम साहिल- 09891322178
सिर्फ ईन क्षणो मे सरोकार दिखाने से काम नही चलेगा । बिहार से बाढ को छुटकारे दिलाने के लिए अटल जी की नदीयो को जोडने वाली कोई बडी योजना पर काम शुरु करवाने के लिए सरकार पर दवाब बनाया जाना चाहिए । जिस से जल संशाधन अभिशाप नही, वरदान बन सके ।
हमे अपनी ओर से जैसे भी हो मदद और जागरूकता फैलाने की जरुरत है.
http://araria.wordpress.com
सुलभ – 9891-815616
धन्यवाद !!
हम जेएनयू के छात्र बाढ़ राहत के लिए फंड इक्कट्ठा करने में लगे हुए हैं . जल्द ही हम इस राशि को बिहार भेजेंगे.