लोहे से लोहा कटता है , हम अनशन से अनशन को काटेंगे
इस ऐलान के साथ ही सरकार ने ,
अनशनकारी नेताओं की एक टोली तैयार की
नवनिर्वाचित टोली ने अन्ना बाबा पर,
कर्णप्रिय शब्दों की बौछार की
पहले बाबा का नाटक, फिर अन्ना की नौटंकी
कर लो कितने भी अनशन, सरकार करेगी अपने मन की
हमें अंग्रेज़ मत समझना जो अनशन से डर जाएंगे
अगर बातों से न माने, तो डंडों से समझाएँगे
बंद कमरे में नेताओं की आपस में बात हुई
और दोपहर के भरपेट भोजन के बाद अनशन की शुरुआत हुई
फिर वे सब गद्दियों पर लेटे सुस्ताने लगे
और किसने किसने क्या क्या खाया आपस में बताने लगे
एक बोला मैं सात पल और कई बिजली संयंत्र खा गया
दूसरे ने कहा वो बुलेटप्रूफ जैकेट और कई तोपें दबा गया
वो अपने अपने कारनामों को बेशर्मी से बताने लगे
और अपनी परिपक्व पाचनशक्ति से प्रभावित हो सब तालियाँ बजाने लगे
अभी अनशन को पाँच घंटे ही बीते हैं और पेट की हर आंत अकड़ गयी है
क्या बताएं खाने की कुछ ऐसी आदत सी पड़ गयी है
तभी एक बोला,
तुम लोगों ने तो कुछ भी नहीं खाया,
अगर मैं मौका पाऊँगा
तो मेरे भाई मैं पूरे का पूरा देश खा जाऊंगा
देश खाने की योजना सुन उन सबकी आँखों में चमक आ गयी
और इनकी देशभक्ति देख,
माँ भारती का कंठ सूखा, हृदय रोया और आँखें छलछला गईं ।
नीरज त्रिपाठी
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सटीक कटाक्ष है…
वाह! वाह! ये मजेदार है। वैसे यहां लाइक करने की भी सुविधा है। लाइक करके फ़ूटना अच्छा है भाई!