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  • सैर सपाटा

    पिछले महीने एक हफ्ते की छुट्टी मिली | मन में उमंगें और उत्साह लिए उछलते हुए निकल पड़े हम एक शहर की सैर पर | ट्रेन के सफर में हमारा अंतर्मन कुछ ज्यादा मजा लेता है तो हम छुक्छुकाने  लगे एक सुपरफास्ट एक्सप्रेस और उसमें बैठे कुछ सहयात्रियों के साथ | इधर ट्रेन ने प्लेटफार्म [...]

    बिहार में प्रलय

     
    बचपन में माँ से था सुना जल देव हैं जीवन आधार
    जल ही जल बस जल ही जल हर तरफ़ चीख बिलख हाहाकार   
    उजड़ने बहने का मौसम वीभत्स है डरावना है
    कोसी के इस अभिशाप को इस कहर को मिल थामना है
    खोयी हँसी खोयी खुशी सब खो गयीं बातें वहां
    बह गए हैं घर बहुत अब बह रहीं आँखें [...]

    ‘महावीर’ ब्लॉग पर मुशायरा

    सूचना

    ‘महावीर‘ ब्लॉग पर मुशायरा (कवि-सम्मेलन)
    “बरखा-बहार”

    वरिष्ठ लेखक, समीक्षक, ग़ज़लकार श्री प्राण शर्मा जी की प्रेरणा से जुलाई १५, २००८ एवं जुलाई २२,२००८ को ‘इस ब्लॉग पर मुशायरे का आयोजन किया जा रहा है।
    इस ब्लाग पर मुशायरे में शिरकत के लिए कवियों की बड़ी तादाद होने की वजह से मुशायरे को दो भागों में दिया [...]

    एक और विस्फोट

    लाल है अब शहर था कल तक गुलाबी
    मिट गया सिंदूर हाथ मेंहदी है अभी भी
    राख है वो आज मासूमियत उसकी हँसी
    सुलगेगी बस अब जिंदगी भर जिंदगी
    वो जहाँ जब भी जो चाहेंगे करेंगे
    हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे
    था लगा मन में वो कुछ सपने संजोने
    था क्या पता हैं पापियों के हम खिलौने
    बम फटे [...]

    प्यार व्यार

     
    सोचा जब सब लेते हैं तो हम भी मजा लेंगे
    भोलू बनकर कब तक जीवन यापन करेंगे
    सुनहरा मौसम तिथि एकादशी कार्तिक मास
    कर दी शुरू हमने अपने प्यार की तलाश
    आंखों में आंखें हाथ हाथों में
    कट रहे थे दिन मीठी मीठी बातों में
    हम सिनेमा नहीं देखते थे वो बोलीं देखेंगे
    हमने सोचा चार दिन की जिंदगी है मजे लेंगे
    फिर [...]

    पति या कुत्ता

    पति या कुत्ता
    नीरज त्रिपाठी

    उस दिन शर्मा जी जब घर लौटे तो उन्होने देखा कि पूरे घर में सजावट थी और बड़ा सा केक भी रखा था, शर्मा जी के कुछ सोचने से पहले ही उनकी पत्नी नीलू जी ने अचानक प्रकट होते हुए कहा ‘…सरप्राइज।’ शर्मा जी ने सोचा कि उन्हें अपना जन्मदिन याद नहीं [...]

    महाराष्ट्र में नवनिर्माण

    बस एक ध्येय बस एक लक्ष्य वो जहर उगलते जाते हैं
    भावुक भोली जनता का ख़ुद को शुभचिंतक बतलाते हैं
    सत्ता लोलुप घडियालों का कोई ईमान नही होता
    नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
    निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता
    बन रहे शेर सब आज भेडिये खूनी दांत छिपाते हैं
    पूज्य शिवाजी को वो अपना आदर्श बताते [...]

    नोट – नीरज त्रिपाठी

    नोट
    कुछ नोट
    जिन्हें देख रिक्शे वाले,खोमचे वाले
    कहते हैं
    बहुत बड़ा नोट है बाबू टूटे दो
    वही नोट
    शराब के ठेके पर, उस विदेशी शोरूम में
    लगते हैं
    बहुत छोटे……….
    नीरज त्रिपाठी

    मैं और तुम

    उस दिन
    मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
    थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
    मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
    उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
    अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ

    हमारे पतलू भाई

    हमारे पतलू भाई
    नीरज त्रिपाठी
    पतलू भाई जिन्हें कुछ लोग किताबी कीड़ा कहते तो कुछ किताबें चाटने वाला दीमक। पतलू भाई थे मस्त मौला जो इन सब बातों को सुनकर वैसे ही अनसुना कर दिया करते जैसे संगीत के जानकार आजकल के फ़िल्मी गानों को। पढ़ाई और तैयारी तक तो सब ठीक रहता लेकिन परिणाम का तो [...]