ऐंटी सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
लड़िकयों ने किया विचारमंथन
टकराव का बनाया मन
शुरू हुआ देशव्यापी धरना प्रदर्शन
विचित्र समस्या आ गई आज
जब लड़िकयों ने उठाई
सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
के खिलाफ आवाज
अब मुश्किल चुप रहना था
लड़िकयों का बस केवल
इतना कहना था
इस कमेटी के कारण
लड़के हमसे डरते हैं
न हमें देखते हैं
न प्रपोज करते हैं
इस कमेटी का [...]
May 6, 2008
Categories: कविता, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments
सोचा जब सब लेते हैं तो हम भी मजा लेंगे
भोलू बनकर कब तक जीवन यापन करेंगे
सुनहरा मौसम तिथि एकादशी कार्तिक मास
कर दी शुरू हमने अपने प्यार की तलाश
आंखों में आंखें हाथ हाथों में
कट रहे थे दिन मीठी मीठी बातों में
हम सिनेमा नहीं देखते थे वो बोलीं देखेंगे
हमने सोचा चार दिन की जिंदगी है मजे लेंगे
फिर [...]
April 16, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 3 Comments
पति या कुत्ता
नीरज त्रिपाठी
उस दिन शर्मा जी जब घर लौटे तो उन्होने देखा कि पूरे घर में सजावट थी और बड़ा सा केक भी रखा था, शर्मा जी के कुछ सोचने से पहले ही उनकी पत्नी नीलू जी ने अचानक प्रकट होते हुए कहा ‘…सरप्राइज।’ शर्मा जी ने सोचा कि उन्हें अपना जन्मदिन याद नहीं [...]
April 11, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 8 Comments
उस दिन
मेरे घर से निकलते ही बंटू छींका
थोड़ा आगे गया तो बिल्ली ने रास्ता काटा
मैं ये सब मानता न था सो चलता रहा
उसी दिन मेरी तुमसे पहली मुलाक़ात हुई
अब मैं कट्टर अंध विश्वासी हूँ
March 23, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments
हमारे पतलू भाई
नीरज त्रिपाठी
पतलू भाई जिन्हें कुछ लोग किताबी कीड़ा कहते तो कुछ किताबें चाटने वाला दीमक। पतलू भाई थे मस्त मौला जो इन सब बातों को सुनकर वैसे ही अनसुना कर दिया करते जैसे संगीत के जानकार आजकल के फ़िल्मी गानों को। पढ़ाई और तैयारी तक तो सब ठीक रहता लेकिन परिणाम का तो [...]
March 10, 2008
Categories: नीरज त्रिपाठी, व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 5 Comments
मुर्गी कुड़्कुड़ाई, मुर्गे चिल्लाने लगे
मुर्गों के जुकाम से प्रशासन में बुखार के
लक्षण नजर आने लगे
मुर्गे पकड़ने में जुटे अधिकारी
गए बाकी सब भूल
मुर्गे पकड़ते पकड़ते पहुंचे एक स्कूल
स्कूल से दस मुर्गे पकड़ अधिकारियों के
सीने तने हुए थे
बाद में पता चला थे तीन असली मुर्गे और सात बच्चे
जो उस समय मुर्गा बने हुए थे
यह देख प्रशासन ने [...]
January 21, 2008
Categories: व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 2 Comments
धूम्रपान एक कार्य महान
सिगरेट है संजीवनी
पीकर स्वास्थय बनाओ
समय से पहले बूढ़े होकर
रियायतों का लाभ उठाओ
दूध और फल खाकर
हरगोपाल बनते हैं
हैरी और माइकल तो
सिगरेट पीकर निकलते हैं
जो नहीं पीते उन्हें
इस सुख से अवगत कराओ
बस में रेल में सार्वजनिक स्थलों पर
सिगरेट सुलगाओ
अगर पैसे कम हैं
फिर भी काम चला लो
जरूरी नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो
बीड़ी सफलता [...]
January 12, 2008
Categories: व्यंग्य/हास्य . . Author: नीरज त्रिपाठी . Comments: 4 Comments