बस एक ध्येय बस एक लक्ष्य वो जहर उगलते जाते हैं
भावुक भोली जनता का ख़ुद को शुभचिंतक बतलाते हैं
सत्ता लोलुप घडियालों का कोई ईमान नही होता
नकारात्मक भावों का जग में सम्मान नहीं होता
निर्दोषों की लाशों पर चढ़ नवनिर्माण नहीं होता
बन रहे शेर सब आज भेडिये खूनी दांत छिपाते हैं
पूज्य शिवाजी को वो अपना आदर्श बताते [...]
March 31, 2008
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क से है कन्याकुमारी
जहां तक सीमा हमारी
क से है कश्मीर भी
और क से ही है कारिगल
क से ही था वह कबूतर
शान्ति का हमने उड़ाया
लेकिन हमेशा की तरह
इस बार भी है धोखा खाया
शत्रु ने जब भी है छेड़ा
हर बार हमने है खदेड़ा
शान्ति के हम हैं पुजारी
लेकिन हुआ जब युद्व जारी
युद्व के इस सघन पथ [...]
January 26, 2008
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जब मैं छोटा था नासमझ था
सोचता था अपना सब कुछ देश हित में लगाऊँगा
अब मैं टैक्स की चोरी करता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ
जब मैं छोटा था नासमझ था
लोग मेरा मन मेरी आंखों से पढ़ लेते थे
अब मैं काला चश्मा लगाता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया [...]
January 7, 2008
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सभी हिन्दी प्रेमियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …
ग्रीटिंग हमको मिले बहुत
अबकी मनी आर्डर मिल जाए
नया साल कुछ ऐसे आए
अब तक तो घूरा है उसने
अब जब देखे वो मुस्काये
नया साल कुछ ऐसे आए
उसने पैसे मुझे दिए थे
ऐसे भूले याद न आए
नया साल कुछ ऐसे आए
कोई ऐसा यार मिले
फोकट में जो चाय पिलाये
नया साल कुछ [...]
January 5, 2008
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October 20, 2007
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