इंजीनियर साहिब

सॉफ्टवेयर इंजीनियर चिरौंजी लाल, बचपन का नाम चुनमुन
जब से इंजीनियर बना है, रहता है गुमसुम गुमसुम
बचपन मे सुना था, इंजीनियर के जलवे होते हैं
पैसों पे सोते हैं, कई गाड़ी कई बंगले होते हैं
एक बार इंजीनियर बन गए, तो लाइफ बन जाती है
इतना पैसा मिलता है, आने वाली पीढ़ी बैठे बैठे खाती है
लोग इंजीनियर साहिब कहकर बुलाते हैं
इंजीनियर गोल्फ खेलते हैं टेनिस क्लब जाते हैं

कहते हैं कि सपने टूटने पे आवाज नहीं आती है
कभी हो जाये गलतफहमी तो जाते जाते जाती है

रिसेशन, ऐसा कुछ तो बताया नहीं था,
किसी ने बचपन मे
ज़ीरो हाइक, ये शब्द तो कभी सुना ही,
नहीं था बचपन मे
फायरिंग, अरे ये तो सीमा पे होती थी,
इसका तो इंजीनियरिंग से कोई,
वास्ता नहीं था बचपन मे
वर्क प्रेशर, लेकिन इंजीनियर साहिब तो
गोल्फ खेलने जाते थे
नाइट आउट, वाट लगना, टीम डिजोल्व
काश कोई बता देता बचपन मे
सच है, चुनमुन बिट्टू पिंकू टीनू सब
बड़े भोले थे बचपन मे

पहली पेमेंट से ली गयी ली की जीन्स
और रीबॉक के जूते अब फटने लगे हैं
बचपन मे देखे ख्वाब,
इंजीनियरिंग करके बिखरने लगे हैं

नजर घुमाता हूँ, तो कई चिरौंजी लाल नजर आते हैं
लैपटाप बेताल की तरह हमेशा पीठ पर लद जाता है
घर मे लैपटाप आफिस मे लैपटाप
छुट्टियों मे भी लैपटाप, चुनमुन संघ घूमने जाता है

पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब
खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब
सुन पढ़ने मे बड़ा मजा आता था
खेलने वाले आई पी एल मे करोड़ों कमा रहे हैं
गाने बजाने वाले इंडियन आइडल जा रहे हैं
और इंजीनियर साहिब, बेताल को सैर करा रहे हैं

नीरज त्रिपाठी

Advertisements

गब्बर सिंह और मंदी

डरते थे सुनकर जैसे सब, गब्बर सिंह का नाम
छाया है जग में वैसे ही, मंदी का कोहराम
मंदी का कोहराम, मैनेजर हैं धमकाते
हाइक पूछो, तो फायरिंग के फ़िगर दिखाते
धुक धुक करके सबकी नैया खिसक रही है
करियर की गाड़ी धन्नो सी बिदक रही है

कैबिन में बैठे गब्बर सा रौब जमाते
और बसंती समझ काँच पर नाच नचाते
वीकेंड भी अब ऑफिस में ही मना रहे हैं
आईटी में आने की कीमत चुका रहे हैं
फिल्म की इच्छा कोने में कहीं सिसक रही है
करियर की गाड़ी धन्नो सी बिदक रही है

यह मंदी तो चौके छकके छुड़ा रही है
ट्रेनी से डाइरेक्टर सबको नचा रही है
मम्मी पापा को जो घर पर आँख दिखाते
बड़े प्यार से ऑफिस में सर से बतियाते
यस सर यस सर करके सबकी निपट रही है
करियर की गाड़ी धन्नो सी बिदक रही है

जैसे तैसे रोज नौकरी बचा रहे हैं
जिम जाने की इच्छा मन में दबा रहे हैं
मैनेजर से पहले आकर देर में जाते
काम में पगलेट हो गए हों ऐसा दर्शाते
हंसी आ गयी तो वो सबको खटक रही है
करियर की गाड़ी धन्नो सी बिदक रही है

नीरज त्रिपाठी

सोते रहो

करते करते काम कभी गर तुम थक जाओ
कार्यालय में कुर्सी पर चौड़े हो जाओ

ऐसे सोओ सहकर्मी भी जान न पाएँ
रहे ध्यान ऑफिस में न खर्राटे आयें

ऐसे लो जम्हाई कि दूजे भी अलसाएं
मैनेजर की फटकारें लोरी बन जाएँ

चिंतन की मुद्रा में नींद का झोंका मारो
मीटिंग में मौका पाते ही चौका मारो

ऐसा हो अभ्यास बैठे बैठे सो जाओ
कुंभकरण को तुम अपना आदर्श बनाओ

दो कुरसियां मिलाए के लेओ पैर पसार
मीठी अपनी नींद है इसका मजा अपार

नीरज त्रिपाठी

माँ की ममता

एक छोटा सा बच्चा था, हर बात माँ को बताता था

कभी हँसता था कभी रोता था

माँ के आँचल को दुनिया समझता था ।

 

बच्चा धीरे धीरे बड़ा हुआ, अपने पैरों पे खड़ा हुआ

जब वो घर आता, माँ के संग खूब समय बिताता

ऑफिस में क्या क्या हुआ , माँ को बताता

समय बढ़ता गया, बेटा माँ की सेवा करता गया

फिर माँ ने करा दी, बेटे की शादी ।

 

माँ की आँखों से ख़ुशी के आंसू बह रहे थे

शादी के बाद बेटा बहू मिलके माँ की सेवा कर रहे थे

बेटा अब जब ऑफिस से घर आता था

माँ से प्यार से बातें करता और पैर दबाता था ।

 

अब ये मत सोचो कि कविता के अंत में माँ को रुलायेंगे

माँ को खाना बनाने छोड़ बेटा बहू पिक्चर जायेंगे

ये हैप्पी एंडिंग वाली कविता है, इसे ऐसे ही चलने दो

हमेशा गलत मत सोचो, उन लोगों को खुश रहने दो

ये एक अच्छा बच्चा है, ऐसे बच्चे हर माँ को मिलें

कोई जरूरी नहीं कि सारे बच्चे नालायक निकलें।

नीरज त्रिपाठी

वैलेंटाइन डे

इश्क की दुकानों में पकने लगे पकवान
प्यार के परिंदे चढ़ने लगे परवान
जहाँ देखो दिखे है दुनिया हरी भरी
आशिक सभी बौराए देख चौदह फरवरी

लेकिन हमारे लिए कैसी चौदह फरवरी
काहे का वैलेंटाइन डे
आज भी फुक्कड़ हैं कल भी अकेले थे

लड़कियों को तो हम डाकू नजर आते हैं
एक से एक थके उजड़े चेहरे लड़कियां घुमाते हैं

ग्रेजुएशन में एक लड़की से बोला था
तुम्हारी मुस्कान बहुत सुंदर है
वो बोली नीरज पढाई में मन लगाओ
ये पढने लिखने की उमर है

फिर तो हम इतना पढ़े कि चश्मा लगने तक की नौबत आई
इसी बीच दिशा के घर गाये गए मंगलगीत
किसी और के साथ हो गई विदाई

फिर सुना कि बाईक वाले लोग लड़कियां घुमाते हैं
हमने सोचा इसमें क्या है हम भी ले आते हैं

लेकिन जब से बाईक ली है
एक सहकर्मी को बिठा के ऑफिस ले जा रहा हूँ
उस कदुए के लिए बाईक की किश्तें चुका रहा हूँ

ऑफिस में नई लड़की के आते ही सभी पुराने खिलाड़ी
भौंरा बनकर मडराने लगे
हमारे मन में भी गूंजा ईलू ईलू
हम भी जलवे दिखाने लगे

लेकिन यहाँ भी हमारी दाल गल नही पायी
एक बार फिर किसी और के कुकर में सीटी आई
कभी इसे तो कभी उसे देख दिल में हलचल हुई
लेकिन हर कोशिश भारत पाक शान्ति वार्ता की तरह विफल हुई

उम्मीद पर दुनिया टिकी है हम भी टिकेंगे
कभी तो नंबर लगेगा कोशिश करते रहेंगे

गणतन्त्र दिवस

छब्बीस जनवरी की परेड में
हांथी देखे घोड़े देखे, देखे तोप जहाज
भारत की ताकत दुनिया को
दिखलाते हम आज

प्यारी प्यारी सजी झाँकियाँ
अद्भुत रीति रिवाज
भारत की ताकत दुनिया को
दिखलाते हम आज

नमन शहीदों को करते हम
जिन पर सबको नाज
भारत की ताकत दुनिया को
दिखलाते हम आज

हम एक थे हम एक हैं
गूँज रही आवाज
भारत की ताकत दुनिया को
दिखलाते हम आज

नीरज त्रिपाठी

मुन्ने की कार

मुन्ने की कार

मुन्ने की प्यारी सी कार
रंग लाल है पहिये चार

नीले पीले हरे खिलौने
डिग्गी में हैं भरे खिलौने।

छोटी छोटी सी दो लाइट
हार्न बजाकर मुड़ता राइट

झीली टूटू दीपू आए
मुन्ना सबको सैर कराये।

नीरज त्रिपाठी