कारगिल

  से है कन्याकुमारी

जहां तक सीमा हमारी

से है कश्मीर भी

 और से ही है कारिगल

  से ही था वह कबूतर

 शान्ति का हमने उड़ाया

लेकिन हमेशा की तरह

 इस बार भी है धोखा खाया

 शत्रु ने जब भी है छेड़ा

हर बार हमने है खदेड़ा

शान्ति के हम हैं पुजारी

 लेकिन हुआ जब युद्व जारी 

युद्व के इस सघन पथ में

मां की रक्षा की शपथ में

शस्त्र हमने हैं उठाए

शत्रु ही अब नजर आए

 जिन्दगी की चाह किसको

मौत की परवाह किसको

जीवित अगर हम बच गये

तो विजयतिलक करवाएंगे

सौभाग्य से यदि मिली मृत्यु

तो हम शहीद कहलाएंगे

 देशहित में कई दीपक

ज्योति अपनी दे चले

 उत्साह था उल्लास था

इस देश को सब दे चले 

मां की अश्रुधार बहती

 वो तो बस इतना ही कहती

लाल मेरा क्यों आए

कि तेरी मां बुलाए 

छोड़ दे अब बचपना ये

 मां को क्यों इतना सताए

गले से तू लिपट जा

मेरे आंचल में सिमट जा

  छुपा लूंगी तुझे मैं

जाने दूंगी कहीं मैं

इक्कीस का ही था अभी वह

 दूर इतनी क्यों गया

लाडला मेरा दुलारा

 नींद गहरी सो गया

 माना मेरा वह लाल प्यारा

दूर मुझसे आज है

 लेकिन मुझे उस वीर की

 वीरता पर नाज है

 पानी अगर हो रगों में तो

 दुश्मनों को माफ कर दो

यदि दूध मां का है पिया तो

 जड़ों से ही साफ कर दो

 पुनः यदि कुद्रष्टि डाली

 तो फिर वो मुंह की खाएंगे

 हमें है सौगन्ध यह

हम जीतकर ही आएंगे

 हम तिरंगा अपना प्यारा

शान से फहराएंगे

सम्मान से फहराएंगे

अभिमान से  फहराएंगे

बर्ड फ्लू अमर रहे

मुर्गी कुड़्कुड़ाई, मुर्गे चिल्लाने लगे

मुर्गों के जुकाम से प्रशासन में बुखार के

लक्षण नजर आने लगे 

मुर्गे पकड़ने में जुटे अधिकारी

गए बाकी सब भूल

मुर्गे पकड़ते पकड़ते पहुंचे एक स्कूल 

स्कूल से दस मुर्गे पकड़ अधिकारियों के

सीने तने हुए थे

बाद में पता चला थे तीन असली मुर्गे और सात बच्चे

जो उस समय मुर्गा बने हुए थे 

यह देख प्रशासन ने जारी किया फरमान

 बर्ड फ्लू रहने तक

 बच्चों को मुर्गा बनाने का हुआ ऐलान

 शिक्षकों ने दिया एक दूजे को ढांढस

 अपना दर्द बांटा

बिन मुर्गे मुर्गियों के कक्षा में

 लगने लगा सन्नाटा 

शिक्षकों को आशा है कि वो

जल्दी ही फिर जादूगर बन जाएंगे

फिर कक्षा में भोर होगी

फिर मुर्गे कुड़कुड़ाएंगे 

इधर सुना है कि छोटे छोटे बच्चे

बड़ी बड़ी संख्याओं में मन्दिर जा रहे हैं

कभी खत्म हो बर्ड फ्लू

मन्नत मान प्रसाद चढ़ा रहे हैं 

धूम्रपान

धूम्रपान एक कार्य महान
सिगरेट है संजीवनी
पीकर स्वास्थय बनाओ
समय से पहले बूढ़े होकर
रियायतों का लाभ उठाओ

दूध और फल खाकर
हरगोपाल बनते हैं
हैरी और माइकल तो
सिगरेट पीकर निकलते हैं

जो नहीं पीते उन्हें
इस सुख से अवगत कराओ
बस में रेल में सार्वजनिक स्थलों पर
सिगरेट सुलगाओ

अगर पैसे कम हैं
फिर भी काम चला लो
जरूरी नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो

बीड़ी सफलता की सीढ़ी
इस पर चढ़ते चले जाओ
मेहनत की कमाई
सही काम में लगाओ

जो हड्डियां गलाते हैं
वो तपस्वी कहलाते हैं
ऐ कलयुग के दधीचि
हड्डियों के साथ करो
फेफड़े और गुर्दे भी कुर्बान
क्योंकि…
धूम्रपान एक कार्य महान

काश मैं नासमझ ही रहता

जब मैं छोटा था नासमझ था
सोचता था अपना सब कुछ देश हित में लगाऊँगा
अब मैं टैक्स की चोरी करता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

जब मैं छोटा था नासमझ था
लोग मेरा मन मेरी आंखों से पढ़ लेते थे
अब मैं काला चश्मा लगाता हूँ
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

जब मैं छोटा था नासमझ था
लड़ता था खुट्टी होती थी फिर तुरंत मुच्ची हो जाती थी
अब मेरी याददाश्त बहुत अच्छी है छोटी सी बहस भी बरसों याद रहती है
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

जब मैं छोटा था नासमझ था
माँ पापा जो सिखाते बताते थे वही मेरी दुनिया थी
अब सबके सामने पैर छूने में थोडी शर्म आती है
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

जब मैं छोटा था नासमझ था
मन की बातों को कागज पर लिख देता था
अब लिखता हूँ ये सोचकर इसे कैसा लगेगा वो क्या काहेगा
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

जब मैं छोटा था नासमझ था
सोचता था मैं और भाई राम लक्ष्मण की तरह रहेंगे
अब राम सीता माँ के और लक्ष्मण उर्वशी के साथ रहते हैं
अब मैं बड़ा हो गया हूँ समझदार हो गया हूँ

पता भी न चला कि कब मैं नासमझ से समझदार होता चला गया
कब अपनों से दूरियां बढ़ी कब सपनों की दुनिया छिनी
खुशकिस्मत होते हैं वो चन्द लोग
जो हमेशा नासमझ रहते हैं और जिनका बचपना कभी खोता नहीं

नया साल नया ब्लॉग

सभी हिन्दी प्रेमियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …

ग्रीटिंग हमको मिले बहुत
अबकी मनी आर्डर मिल जाए
नया साल कुछ ऐसे आए

अब तक तो घूरा है उसने
अब जब देखे वो मुस्काये
नया साल कुछ ऐसे आए

उसने पैसे मुझे दिए थे
ऐसे भूले याद न आए
नया साल कुछ ऐसे आए

कोई ऐसा यार मिले
फोकट में जो चाय पिलाये
नया साल कुछ ऐसे आए

चोरी कर कुछ ऐसा लिख दूँ
कवि सम्मेलन में  छा जाए
नया साल कुछ ऐसे आए

फेल  हुआ है कई बार
अबकी पप्पू पास हो जाए
नया साल कुछ ऐसे आए

एक कुण्डली
 
नए साल में सब खिलें , खुशी मिले भरपूर
डोले हंसी ठहाका, , रोना होवै दूर
रोना होवै दूर , मजे में झूमें गाएं
चच्चे बच्चे मिलकर सारे, खुशी मनाएं
कलुआ उछला मुनिया फुदकी, मस्ती छाई
नए साल की सुबह , नई उम्मीदें लाई