एक और विस्फोट

लाल है अब शहर था कल तक गुलाबी
मिट गया सिंदूर हाथ मेंहदी है अभी भी
राख है वो आज मासूमियत उसकी हँसी
सुलगेगी बस अब जिंदगी भर जिंदगी
वो जहाँ जब भी जो चाहेंगे करेंगे
हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे
था लगा मन में वो कुछ सपने संजोने
था क्या पता हैं पापियों के हम खिलौने
बम फटे और साथ में अरमान उसके
बहन खोयी भाई खोये खोये हैं बेटे किसी ने
कैसे मरे कितने मरे दो चार दिन चर्चा करेंगे
हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे

शर्ट के टुकड़े मिले हैं लाल गायब
लाश भी मिलती नही कुछ को चहेतों की
सरकार ने तो कर दिया है काम अपना
एक कमेटी थोड़ा शोक थोड़ा पैसा
ये धमाके कल हुए थे आज भी और कल भी होंगे
हम नपुंसक थे नपुंसक हैं नपुंसक ही रहेंगे

नीरज त्रिपाठी

ऐंटी सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी

ऐंटी सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी

लड़िकयों ने किया विचारमंथन
टकराव का बनाया मन

शुरू हुआ देशव्यापी धरना प्रदर्शन

विचित्र समस्या आ गई आज

जब लड़िकयों ने उठाई
सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
के खिलाफ आवाज

अब मुश्किल चुप रहना था
लड़िकयों का बस केवल
इतना कहना था

इस कमेटी के कारण
लड़के हमसे डरते हैं
न हमें देखते हैं

न प्रपोज करते हैं

इस कमेटी का कोई नियम
समझ में नहीं आता है

केवल बारह सेकन्ड तक हमें
देखने पर केस बन जाता है

अरे ये कमेटी वाले इतनी सी
बात क्यों नहीं समझते हैं
कि हम इन लड़कों के लिये ही
सजते संवरते हैं

जब से यह कमेटी अस्तित्व में आई है
जीवन हुआ नरक नीरसता छाई है

हम भूले अपनी तारीफें
भूले बाइक की सैर
दुदार्न्त कमेटी वालों
अब नहीं तुम्हारी खैर

हम नारी शक्ति
व्यापक रूप से दिखाएंगे
किसी भी हाल में ऐंटी सेक्सुवल
हैरैसमेन्ट कमेटी बनवाएंगे

अन्याय अत्याचार के खिलाफ
बिगुल बजने लगा
प्रशासन का सिंहासन
तेजी से हिलने लगा
नारी शक्ति संगठित देख
प्रशासन ने मानी हार
ऐंटी सेक्सुवल हैरैसमेन्ट कमेटी
की मांग हुई स्वीकार

नयी कमेटी बनते ही नियम
तेजी से बदलने लगे
लड़कों के व्यंग्य बांण एक बार फिर
लड़िकयों पर चलने लगे

बदला मौसम देख
लड़िकयां आनन्द सागर में
गोते लगाने लगीं
एक बार फिर सजधजकर
सार्वजनिक स्थलों पर आने लगीं

अब किसी लड़की को देखा
तो कम से कम बारह सेकन्ड
देखना हुआ मजबूरी
हर लड़के के लिये
एक गर्लफ्रैन्ड हुई जरूरी

बाइक चलाते समय
हेलमेट या लड़की में से
किसी एक से काम चलेगा
अच्छे कमेन्टस पास करने वाले को
आशिक प्रतिभा पुरूस्कार मिलेगा

नये नियम तो बहुत हैं
विस्तार से बताऊंगा
अभी जाकर कुछ करता हूं
नहीं तो कुछ न करने के
केस में फंस जाऊंगा

नीरज त्रिपाठी