वैलेंटाइन डे

इश्क की दुकानों में पकने लगे पकवान
प्यार के परिंदे चढ़ने लगे परवान
जहाँ देखो दिखे है दुनिया हरी भरी
आशिक सभी बौराए देख चौदह फरवरी

लेकिन हमारे लिए कैसी चौदह फरवरी
काहे का वैलेंटाइन डे
आज भी फुक्कड़ हैं कल भी अकेले थे

लड़कियों को तो हम डाकू नजर आते हैं
एक से एक थके उजड़े चेहरे लड़कियां घुमाते हैं

ग्रेजुएशन में एक लड़की से बोला था
तुम्हारी मुस्कान बहुत सुंदर है
वो बोली नीरज पढाई में मन लगाओ
ये पढने लिखने की उमर है

फिर तो हम इतना पढ़े कि चश्मा लगने तक की नौबत आई
इसी बीच दिशा के घर गाये गए मंगलगीत
किसी और के साथ हो गई विदाई

फिर सुना कि बाईक वाले लोग लड़कियां घुमाते हैं
हमने सोचा इसमें क्या है हम भी ले आते हैं

लेकिन जब से बाईक ली है
एक सहकर्मी को बिठा के ऑफिस ले जा रहा हूँ
उस कदुए के लिए बाईक की किश्तें चुका रहा हूँ

ऑफिस में नई लड़की के आते ही सभी पुराने खिलाड़ी
भौंरा बनकर मडराने लगे
हमारे मन में भी गूंजा ईलू ईलू
हम भी जलवे दिखाने लगे

लेकिन यहाँ भी हमारी दाल गल नही पायी
एक बार फिर किसी और के कुकर में सीटी आई
कभी इसे तो कभी उसे देख दिल में हलचल हुई
लेकिन हर कोशिश भारत पाक शान्ति वार्ता की तरह विफल हुई

उम्मीद पर दुनिया टिकी है हम भी टिकेंगे
कभी तो नंबर लगेगा कोशिश करते रहेंगे